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Friday, October 10, 2008

लिव इन रिलेशनशिप पर महाराष्ट्र सरकार की मंजूरी ने देश के युवा वर्ग को तोहफा दिया है, या उन्हें अपनी जिम्मेदारियों से विमुख न होने के संदर्भ में पहला कदम उठाया है। बात तो थोड़ा देर से ही समझ में आएगी, लेकिन पहला सवाल यह है कि ये रिलेशनशिप कैसा है जिसे हम केवल इसलिए पूरी तरह से नही अपनाते क्योंकि शायद हमें अपनी पसंद पर भरोसा नहीं होता? क्योकिं हम केवल इसलिए इसलिए अपने उस साथी को अपना सब कुछ नही मानते क्योंकि हमें ये भरोसा नही होता की भविष्य में हमें या हमारे साथी को कोई औऱ पसंद आ जाए तो हम क्या करेंगे? भाई... जमाना जो इतना बदल रहा है। आज कि इस दौड़ती-भागती दुनिया में इंट्रैक्शन इतना ज्यादा है कि कोई भी भरोसे में नही की कल क्या होगा। किसी को अपने साथी पर विश्वास नही तो किसी को अपने आप पर फिर कैसे कोई किसी एक इंसान को अपना सब कुछ मान सकता है, हां साथ रहना अलग बात है...कोई झंझट तो नही है कम से कम जब तक चाहो तब तक मस्ती मारो फिर कुछ भी बोल कर ब्रेकअप कर लो।

बात गई-आई हो जाएगी, न तो उस लड़की को याद रहेगा न उस लड़के को...

भाई ये अच्छा सिस्टम है, और अपने युवाओं ने इसे हाथों-हाथ लिया भी, पर ये कम्बख्त सरकार है न इसे किसी की खुशी कहा देखी जाती है, आ गई हमारे युवाओं के तथाकथित प्यार के बीच और कानून ले आई की लिवइन रिलेशनशिप में रहने वालों को अब कानूनी मान्यता दी जाएगी। यानी अब जो अधिकार शादी के संदर्भ में कानूनी रूप से मिलते है अब वो सभी अधिकार लिवइन रिलेशनशिप में भी लागू होंगे... लो भला इन्ही अधिकारों और जिम्मेदारी से बचने के लिए हमारे युवाओं ने ये रिलेशन अपनाया था और अब फिर वही रोना...

बेचारे युवा अपने इस टाइम पास प्यार को अब भला कैसे निभाएंगे? लेकिन दोस्तों बात बुरा मानने की नही है, सोचने की है, की हम अपने जीवन साथी में ऐसी क्या खूबी देखते है जिसे हम अपने प्यार में नही पाते।
क्यों फिर हम अपने इस रिश्ते को प्यार का नाम देकर प्यार को क्यो बदनाम करते है।कई जगह तर्क आता है कि शादी कोई प्यार की मंजिल नही, लेकिन शादी भी तो बिना प्यार के एक समझौता सी होगी न फिर...जब हम शादी नही कर सकते तो उस इंसान के साथ जिसे हम दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करने का दावा ठोकतें है, जिसके लिए कस्में खाते है वादे करते है, उसे ये आश्वासन नही दे सकते की मै जिंदगी भर तेरा साथ निभाना चाहता हूं।

सिर्फ इस डर से आप अपने रिश्ते, अपने प्यार को ही नही अपने आप को भी खो देते है...

2 comments:

रचना said...

liv in relationship ki paramparaa bharat mae bahut puraani haen so kewal yuva ko dosh daene sae kyaa hoga

manu bhandaaari - rajendara yaadav , imroj amritaa jaane maane naam haen iskae allawa chori chhupae bhi bahut sae rishtey panptey haen samaj mae

nayee peedhi ko kun dosh dae jabki yae sanskaar sab puraani peedhi hee layee haen .

kanun is liyae badla jaata haen kyuiki vartmaan parthityo mae wo obselte ho gayaa haen esaa kanun janney walo kaa mannnaaa haen

naveen kumar 'रणवीर' said...

आप मेरे ब्लॉग पर पधारे आपका धन्यवाद,
आपने शायद मेरे लेख को ध्यान से नही पड़ा, मेरा उद्देश्य केवल युवाओं को दोष देने का नहीं था.
मेरे कहने का मतलब उन लोगों से है जिन्हें अपने आप पर,अपने प्यार पर अपने साथी पर विश्वास नहीं है,सरकार को कानून बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी इस विषय पर ये सोचने की बात है.
जाहिर सी बात है कि कही न कही हम अपनी प्रतिबद्धता(comitment)पर खरे नही उतर रहे है.
हम किसी भी सभ्यता को अपनाते है तो हमारे अंदर वो क्षमता रखनी चाहिए कि हम उसे निभा पाएं, मेरे कहने का मतलब यह कदापि नही था कि ये कल्चर आज के युवाओं की देन है या कल के हमारे बुजुर्गों की.यहीं हमारी कमियां रहती है कि हम अपवादों को नियम मान लेतें है, लेकिन कानून कभी भी अपवाद के आधार पर नही बनते, जिन लोगों का आपने नाम लिया वे सभी अपने अपने क्षेत्रों में काफी नाम कमा चुके है और वे सभी अपने साथी और अपने प्यार के लिए समर्पित रहें, और कोई विवाद यदि हुआ भी तो आपसी समझ-बूझ से निबटा लिए गए...