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Wednesday, January 7, 2009

दोस्ती-प्यार, अपने-पराए, बैरी-बंधु की पहचान कराता है रोडीज्...

एम.टीवी पर चल रहे रिएलिटी शो 'हीरो होंडा रोडीज्' में देश के युवा भाग लेने को कितने आतुर होते है, ये आप सभी भली-भांति जानते होंगे और यदि नहीं जानते तो टीवी चला कर एम.टीवी देख लें। देश का युवा वर्ग खास कर की जो बड़े शहरों में रहता है उसमें तो मानों होड़ है कि वो नौजवान तभी कहलाएगा जब वो रोडीज में भाग लेगा। और यदि ऐसा वह नहीं कर पाता है तो उसके जवान होने पर शक करना लाजमीं सा हो जाता है। अब सवाल ये उठता है कि...ये शो क्या है? तो मैं अपनें उन साथियों को बता दूं जो इस विषय में थोड़ा कम ज्ञान रखते है कि अगर मैं ये कहूं कि ये शो है, जिंदादिली का, जज्बे का, जूनून का, आत्मविश्वास का तो शायद आज के नौजवानों को इस में कोई दो राय नहीं लगेगी,पर ये पूरा सच नहीं है....

ये बात सही है कि इस शो में भाग लेने के लिए आपके अंदर आत्मविश्वास और दर्ढ़ता भरपूर होनी ही चाहिए साथ में पर इतना ही काफी नहीं है दोस्तों...क्या आपको ऐसा लगता है कि आज का युवा आपनी जीत के लिए केवल इन दो गुणों से ही पार हो जाता है, सच तो ये है कि रोडीज् हमें सच दिखाता है...हमें बताता है कि दोस्ती साथ, नैतिकता के माएनें कहां तक बचे रह गए है, आज के इस प्रतियोगी अंधयुग में हम कैसे अपने को अपनी नैतिकता का अपने स्वार्थ के लिए गला घोंट कर कह देते है कि प्रैक्टिकल होना ही कामयाबी का मूल मंत्र है...रोडीज् में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए युवाओं को एक साथ रहना होता है, और वो भी देश कई अलग-अलग हिस्सों में , जहां उन्हें रोज एक चुनौती का सामना करना होता है, और सभी को उस चुनौती(टास्क) को अपनी पूरी क्षमता के साथ पूरा करना होता है। यदि कोई भी साथी को लगे की किसी सदस्य के कारण से हम कोई चुनौती पूरी नहीं कर पाए तो वो सदस्य अपने उस साथी को बाहर करनें के लिए वोट कर सकता है जिसे कि वोटऑउट कहा जाता है।लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल यही कारण होता है वोट करने का, बल्कि इस वोट ऑउट में सदस्य अपने साथी, पक्के दोस्त, दुश्मन सभी को पहचान पाते है।इस शो में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा किसी भी हद तक जाने को आतुर होते है, क्योंकि इसके फॉर्म ही उनसे पूछ लिया जाता है कि आप रोडीज बननें के लिए क्या कर सकते है...

और जो जवाब आते है वो तो माशा अल्लाह होते है। खैर इसमें भाग लेने के लिए आए युवाओं का इंटरव्यू रोडीज के निर्दैशक राघुरामन स्वयं लेते है॥।और जो इंटरव्यू वो लेते है, प्रतिभागियों की भाषा में उसे 'लेना' बोलते है...। रोडीज् में कैसी भाषा का प्रयोग होता है ये तो सभी जानते है। सवाल ये उठता है की आज के युवा क्या ऐसी भाषा से अनिभिग्य हैं? दोस्तों रोडीज में बोलचाल में प्रयोग की जानेवाली भाषा पर बहुतेरे लोगों को ऐतराज़ होता रहा है...पर क्या ये सच नहीं है कि हम में से कितनें युवा आज इस भाषा से अछूते रहे है...। रोडीज में रघुरामन द्वारा जो सवाल किए जाते है वो भी लोगों को अटपटे लगते है, पर वो सवाल उन नकाब लगाए युवाओं, बड़बोले तथाकथित क्रांतिकारियों की सच्चाई जानने के लिए पूछे जाते है। हमारे साथियों की खुद के बारे जो भी गलत फहमियां होती है वो रोडीज के इंटरव्यू में सामने आ जाती है...। जो भी साथी लोग अपने को स्वाभिमानी, बलिदानी, मददगार,कर्तव्यनिष्ठ या एक अच्छा इंसान मानते है, उनके लिए अपनी सच्चाई जानने का एक सही मंच है रोडीज्। लोगों के पल-पल बदलनें की सच्चाई को दिखाता है रोडीज्... आज के युवा को अपने व्यकित्तव के बारे में जितनी भी गलत फहमियां है उन्हें दर्शाता है...कौन कब बदल जाए इससे सतर्क रहना सिखाता है रोडीज्...दोस्त, प्यार, अपने-पराए बैरी-बंधु की पहचान कराता है रोडीज्.....