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Saturday, April 9, 2011

नींबूज़ ऑन...अनशन गॉन!


मुझे अफसोस है कि इस देश में तह़रीर चौक बना पाना मुश्किल है, आज जंतर-मंतर पर एनजीओ वालो और मीडिया वालों के अलावा तो कोई दिखा नहीं? हां कुछ वो छात्र ज़रूर दिखे जिनके मां-बापों ने भारी-भारी डोनेशन(रिश्वत) देकर उन्हें कॉंन्वेंट स्कूलों में पढ़ाया, जिनके घरों में और फैक्टरियों में बाल-मज़दूरी आम है, जो किसी भी स्थिति में श्रम कानूनों की अवहेलना करते है बिना सीट बेल्ट लगाए गाड़ियां चलाते है पकड़े जानें पर रिश्वत देते है! सबसे ज्यादा संख्या में वे लोग थे जो विकेंड में फोटो सेशन करवाना चाहते थे...दो करोड़ दिल्लीवासी और 125 करोड़ देशवासियों में से 5 हज़ार लोग मौजूद थे जिनमें से 2 हज़ार मीडियाकर्मी थे और २ हज़ार वे लोग थे जो किसी ना किसी तरीके से किसी एनजीओ के साथ जुड़े रहे हैं, एक हज़ार वे लोग थे जो ईमानदार अन्ना का हौंसला बढ़ाने के लिए आए थे, लोगों ने इस प्लेटफॉर्म को भुनाया है। जंतर-मंतर लोकतंत्र का वो पटल है जहां से ना जाने कितनें लोग हर रोज़ अपनी बात को कहने के लिए देश के हर कोने से आते है और वो बेचारे ना जाने कितनें दिनों तक धरने पर बैठे रहते है लेकिन आम जनता ने विकएंड पर अपनी अटेंडेंस एक अच्छे काम पर लगा दी है। जनता की जीत अभी बाकि है...इंतज़ार कीजिए।



स्वामी अग्निवेश ने नींबूज़(पेप्सी प्रॉडक्ट) पिलाकर तोड़ा अनशन


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