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Monday, October 6, 2008

महिला मुख्यमंत्री !

मुख्यमंत्री की सलाह...
दोस्तों, बात अभी निकली ही थी, कि एक युवा पत्रकार की गोली मार कर हत्या कर दी गई।
शहर था राजधानी दिल्ली, जी हां वही दिल्ली जिसके युवा खुद को और शहरों की तुलना में अधिक खुले और स्वतंत्र मानतें है, और भई हो भी क्यों न दिल्ली शहर ही पढ़े-लिखे समझदार लोगों का जो है। अब यहां के युवा स्वतंत्र नही होंगे तो क्या...खैर।
लेकिन बेचारे दिल्ली के युवाओं की गगनचुंभी सोच और हर इंसान के अपनी मर्जी से जीनें के तरीके पर शायद दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमति शीला दीक्षित रोन लगाना चाहती है।
हमेशा से अपने दिए बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाली शीला दीक्षित ने फिर एक बयान दिया, जी हां... युवा पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या हुई। जिसकी चर्चा कितनी हुई आप सभी जानतें है, लेकिन मैडम से जब कुछ बंधुओं ने सवाल पूछा की 'राजधानी की सुरक्षा को लेकर आपकी क्या समझ बैठती है?' तो मैडम का जवाब आया की" इतनी रात को वो लड़की (सौम्या) घर से बाहर क्या करने आई थी, ऑड ऑवर्स में बाहर जाना तो खतरनाक होता ही है, खास तौर से लड़कियों के लिए"।
सुना मैडम की राय,
शीलाजी, आप शायद दिल्ली के मिरांडा हॉउस कॉलेज में पढ़ी है, आपने भी अपने छात्र जीवन में या युवावस्था में जिंदगी अपने अंदाज में जी होगी, और जाहिर सी बात है कि हर कोई जीताभी अपने ही अंदाज से है। सरकार किसी की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का अंकुश नही लगा सकती ।
चाहे वो कही आने-जाने की हो या घूमने की, वैसे मैं आपको बता दूं की सौम्या काम पर से लौट रही थी, अगर वो कहीं से आ भी रही थी तो क्या आपकी सरकार की, या आपकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?
क्या आपकी सरकार कोई ऐसा कानून बनाया है, जिससे की निश्चित समय-अवधि के बाद सरकार की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? क्या सरकार या पुलिस जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल किसी समय अवधि के लिए ही करती है? और लड़कियों के लिए तो केवल अंधेरा होने तक की जिम्मेदारी पुलिस या प्रशासन की होगी... क्या शीला जी, कभी तो आप दिल्ली में देश के बाकी हिस्सों से आनें वाले बेचारे गरीब मजदूरों के कमाने खाने पर बवाल मचातीं है, और कभी लड़कियों को ऑड ऑवर्स में घर से बाहर निकलने पर दोषी ठहराती है। मैडम को शायद अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़नें की आदत है, लेकिन राजनीतिज्ञों द्वारा ऐसी राय देना वो भी खुद एक औरत होते हुए, बहुत औंछी सी बात लगती है।
क्या मैडम आप अपनी चुनावी रैलीओं में से देर से घर नहीं आती? क्या चुनावों के समय में आप रात-रात भर जनता के बीच बैठकें नही लेती?
वाह रि मेरे देश की महिला तेरी हालत तो आज भी वहीं है!
चुनाव जीतनें के लिए महिलाओं को को कुछ यूं रिझाओं की 'महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक स्थिति को सुधारनें का सारा जिम्मा मैं अपने सिर लेती हूं, अपने सी बहन को वहां बैठाओं वो मर्दों की दुनिया हमारी हालत के बारे में क्या जानें, आज की नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नही है हम क्या घर में बैठकर चूल्हा फूंकने के लिए है'
और दो बार मुख्यमंत्री बन जाने पर किसी कामगार महिला की हत्या को गलती करार दो उसी महिला की, क्योंकि वो देर रात को काम पर से लौट रही थी, और मुख्यमंत्री के अनुसार "देर रात को लोग एडवेंचर के लिए घूमतें है"
धन्य हो मेरे देश की महिला...
तूने जिसे अपने ह़क की लड़ाई लड़ने के लिए खड़ा किया वही तेरी न रही..


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