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Wednesday, February 25, 2009

प्यार क्या है...?

दोस्तों,
प्यार करना आज के इस बदलते परिवेश में खाना खानें जैसा प्रतीत होता है, जैसे किसी को भूख लगी तो उसने खाना खा लिया, बाद में और भूख लगेगी तो और खा लेंगे. प्यार एक सुखद अनुभूति से जीवन की दिनचर्या का हिस्सा कैसे बन गया? सवाल ज़रा टेढ़ा है...लेकिन जायज़ है... आज हमारे साथी प्यार तो करते है, लेकिन उसे निभाने में बेचारे पहली बाधा में ही हांफ कर हार मान जाते है..हो भी क्यों न ठीक है किसी से वादा ही तो किया था ना, कोई बात नहीं आगे और मिलेगें...दोस्तों सवाल ये है? कि जब हम प्यार में होते है तो हमें सब कुछ सही लगता है, पर अचानक हमारी आंखें खुल जाती है, हमारा दिमाग दिल से ज्यादा काम करने लगता है, हमें सही और गलत की नई-नई परिभाषाऐं आने लगती है. हम यह निर्णय ले लेते है कि, हमारे माता-पिता की खुशी भी कोई मायनें रखती है. हम अपने प्यार, अपने विश्वास पर खरे नहीं उतर पातें. पर मेरे दोस्तों हम अपनी मर्जी से आपने प्यार को मारते है. हमारे में वो क्षमता नहीं होती की हम अपने प्यार प्रति समर्पित रहें, हमारे पास कई विकल्प जो आ जाते है, और हमारा दिल भी भर जाता है अपनें प्यार से, अब कुछ नया हो जाए...फिर हम अपनें दिल को कुछ इस तरह तस्ल्ल्ली देते है कि यार किस-किस को नाराज करते, माता-पिता से बढ़कर तो नहीं है न प्यार...हां मेरे दोस्त माता-पिता से तो बढ़कर नहीं है प्य़ार, पर ये किस माता-पिता ने कहा था कि प्यार करो... जब तो लगा कि कोई नहीं साथ चलेंगे, साथ लड़ेंगें, पर दिल कि दहलीज पर ये अचानक दिमाग की दस्तक कैसे हो गई. इसका जवाब हर उस इंसान के पास है जो अपने प्यार की कसौटी पर खरे नहूीं उतर पाएं.. दोस्तों प्यार निभानें का नाम है... करते तो सभी है...निभानें में होता है त्याग...और जो त्याग न कर पाया हो उसे कभी जिंदगी में प्यार नहीं मिलता. जिसके दिल में अपनी भावनाओं की कोई इज्जत नहीं वो समाज में अपनें माता-पिता की इ्ज्जत की दुहाई देकर अपने प्यार को खत्म करना चाहे तो वो उसकी सबकी बड़ी गलती होती है, जो अपनें प्यार का सगा न हो सका, वो अपने माता-पिता या पति का क्या सगा हो पाएगा...प्यार भावनाओॆं का सागर है जिसमें कि एहसासों की शांत लहरें भी आती है,और समाजिक प्रतिबंधों सी तेज लहरें भी, लेकिन तेज लहरे क्षणिक होती है, अगर साहिल उन से डरकर पीछे हटता है तो उसका नतीजा तबाही है, लेकिन यदि वो उसे झेल जाए तो वह उसका उन शांत लहरों के लिए प्यार और समर्पण है...

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