Follow by Email

Tuesday, June 2, 2009

दलित महिला स्पीकर!

कांग्रेस का दलित प्रेम किसी भी दलित नेता को सक्रीय राजनीति से अलग करना ही होता है,पहली बार तो कांग्रेस या भाजपा में दलित नेताओं की उपस्थिति केवल एक मंत्रालय के लिए सामाजिक न्याय के संदेश देनें भर के लिए होती है, जिन पार्टियों में आज भी मनुवाद जिंदा हो,वहां राहुल गांधी का किसी दलित के घर में ठहरना या मीरा कुमार को स्पीकर बनाना एक समान लगता है। ये आधुनिक मनुवाद है, जिसमें आप को सत्ता कि शक्तियों से दूर रख काम निकाला जाता है। दोस्तों हम आपको एक बात और बता दें कि कांग्रेस आरक्षित सीटों पर खड़े किए गए अपनें दलित प्रत्याशियों को ही दलित नेता मानती है। सोच लिजिए अगर बाबा साहब अम्बेडकर ने संविधान में दलितों का आरक्षण न दिया होता तो ये शब्द कांग्रेस शब्दकोश में न दिखाई पड़ता। बाबू जगजीवन राम कांग्रेसियों के कहे मुताबिक दलित नेता थे, लेकिन वो अपनी राजनीतिक ज़मीन कभी बिहार के सासाराम से आगे नहीं ले जा सके। आज उनकी ही राजनीतिक विरासत को उनकी आईएफएस बेटी संभाल रही है, औऱ वो भी अपने सीमा क्षेत्र में रह कर। कांग्रेस कोई उन्हें दलितों की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्यों में प्रचार के लिए नहीं बुलाती और न ही अपनी किसी रैली में दलित नेता के रूप में प्रमोट करती है। कांग्रेस भली-भांति जानती है कि "नेता हमारा और वोट तुम्हारा"। कांग्रेस ने कोई पहली बार ऐसा काम नहीं किया, दिल्ली अंबेडकर नगर से 44 साल से जीतते आए चौ.प्रेम सिंह को जब दिल्ली प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया तो कांग्रेस की जीत हुई, लेकिन जब उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किए जानें की बात हुई तो,विधानसभा अध्यक्ष बना कर उन्हें सक्रीय राजनीति से अलग कर दिया।कांग्रेस अपनें दलित नेताओं को न तो प्रचार के लिए उतारती है औऱ न ही दलितों से सीधे संपर्क साधनें की आज्ञा देती है। नारा आज भी वही है जिसको लेकर बाबा साहब अम्बेडकर ने विरोध जताया तो गांधीजी अनशन पर बैठ गए थे "नेता हमारा वोट तुम्हारा". बीजेपी की तो क्या कहें पहली बार किसी दलित को अध्यक्ष बनाया ओर उसी का स्टिंग ऑपरेशन करवा कर बता दिया कि आने वाले समय में कभी किसी दलित को कोई बड़ा काम नहीं दिया जाएगा।

2 comments:

niranjan dubay said...

aapne kaha ki jagjiwan raam ki viraasat unki beti samhaal rahi hain, bilkul sahi kaha aapne, lekin aapko bata du ki jagjiwan raam apne samay saasaram se chunaw ladte the, lekin dhyan apne gaon aur desh ki or bhi rahta tha, parantu meera ji unse pare hain, wo seki sekayi roti khane ko sirf taiyar rahti hain. aapko ek baat aur bata du ki agjivan raam ke gaon me jayenge to kayi aisi sachayi bujurg denge ki aap jagjiwan raam ko bhi daliton kaa hitaisi maanne se inkaar kar denge.
mera blog hai, ' www.apnajahan.blogspot.com '

नवीन कुमार 'रणवीर' said...

निरंजन भाई, मेरे ब्लॉग पर पधारनें के लिए धन्यवाद, मैनें कहीं भी ये नहीं कहा कि मैं जगजीवन राम को दलितों का हितैषी या दलित नेता मानता हूं। ये कांग्रेस का शब्दकोश है, आप शायद मेरे इस लेख पर टिप्पणी न करके, मेरी किसी टिप्पणी पर टिप्पणी कर रहे हैं?