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Friday, April 3, 2009

सांप्रदायिक राजनीति का नया पिस्सू वरूण गांधी...

सांप्रदायिक राजनीति का नया पिस्सू वरूण गांधी, जी मैंने कुछ गलत तो नहीं कहा? कभी हमारे देश में दो बीमारी बड़े जोरों की फैली थी वो थी मलेरिया और डेंगू, खैर आजकल भी कभी कभी ये दोनों अपना प्रकोप देश के की हिस्सों में फैला देती है लेकिन अब लोग पहले से ही सजग हो जाते हैं. समझनें वाले तो इतने में ही समझ गए होंगे कि मेरा इशारा कहां है, जो नहीं समझे वो इस लेख में आगे समझ जाएंगे. खैर हम बात कर रहे थे वरुण गांधी की, भगवा ब्रिगेड का नया पिस्सू, इनकी पार्टी के बड़े नेता पहले ही देश में मलेरिया और डेंगू के मच्छरों की भांति सांप्रदायिकता का ऐसा डंक मारते थे कि लोगों को अस्पताल तक जाने की नौबत नहीं आती थी, वे बेचारे वहीं दम तोड़ देते थे. देश के कुछ हिस्से तो मानों इनका अड्डा बन गए थे, जब चाहा तब किसी को भी काट लिया करते , लेकिन एक बात में ये मलेरिया और डेंगू के मच्छर से पूरी तरह भिन्न थे .वो जो डेंगू या मलेरिया का मच्छर होता ...है वो तो बिना किसी धर्म-जाति जाने काटता था, परंतु ये जो भगवा ब्रिगे़ड के मच्छर हैं ये धर्म जानकर अपना शिकार बनाते. उत्तर प्रदेश शुरुआत में इनका सबसे बड़ा शिकार हुआ, इसके बाद मुंबई फिर गुजरात, फिर उड़ीसा, समय-समय पर मध्य प्रदेश भी इनका शिकार बनता रहा है.जिस तरह से सरकार डेंगू-मलेरिया के मच्छरों से बचने के लिए उपाय बताती है, उसी प्रकार हमारे कुछ धर्मनिरपेक्ष पत्रकार मित्र और सामाजिक कार्यकर्ता समय-समय पर जानता से एहतियात बरतनें को कहते है. लकिन जिनके पास धर्मनिर्पेक्षता की मच्छरदानी न हो उन्हें तो ये काट ही जाते थे. देश के कई राज्यों में इस मच्छरदानी का समय-समय पर टोटा पड़ ही जाता है, जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश. आजकल इस सांप्रदायिक मलेरिया-डेंगू गैंग यानि भाजपाइयों के पास पुराने मच्छरों के डंक प्रभावहीन हो गए थे. इनमें प्रमुख पीएम इन वेटिंग, अयोध्या के कल्याणक सिंह, सांप्रदायिक कटुता का औजार विनय कटियार, वैमनस्यवाद के गुरू आदित्यनाथ-नरेंद्र मोदी रहे हैं. परंतु जनता ने पहले से सुरक्षा बरताना शुरू कर दिया तो, बेचारे सिमट कर आपस में ही डंक मारने लगे और हश्र तो आप देख ही रहे हैं. भगवा ब्रिगेड के नेता खुद से ही पीएम और सीएम हो जाते हैं, शुक्र है कि आगे इन वेटिंग भी लगा लेते हैं वरना तो... आज कल एक नया पिस्सु इस सांप्रदायिक डेंगू-मलेरिया गैंग ने भेजा है जिससे कि जनता को पता भी न चले और डंक मार कर फिर से इस देश को जख्मी कर दे, और करा दे दंगों के अस्पताल में भर्ती...लेकिन वरुण बबुआ आपके गैंग के बड़े मच्छरों का हाल तो आपनें देखा ही है जो सपना आप आज देख रहें हैं वो सपना आपके गैंग के बड़े कीट कब से देखते हुए आज तक आस लगाए बैठे हुए हैं. लेकिन इस देश की जनता को आज फिर वही अयोध्या, फिर वही मुंबई, फिर वही गुजरात, और फिर वही कंधमाल दिखानें की जो आपकी कोशिश वो वही बेवकूफी है, आपकी पार्टी और आप बाद में चाहे जितनी भी सफाई दे दें, लेकिन लोग जानते हैं कि आपकी पार्टी हर बार की तरह इस बार भी सत्ता पानें के लिए अपनी ओंछी सोच और वैमनस्य की विचारधारा पर जो नफरत और सांप्रदायिकता का महल बनाना चाह रही है उसकी ना तो ईटों में दम हैं, न ही गारे में. क्यों कि वो ईंट और गारा दोनों ही खोखले हैं आपकी पार्टी की विचारधारा की तरह, जिसमें न तो राष्ट्रवाद जिसकी आप दुहाई देते है न ही समाजवाद, जिसमें केवल एक ही वाद है वो है वैमनस्यवाद...

2 comments:

Harsh said...

aaj ki in sabhi ki rajneeti avasarvadita se grast ho chali hai ... samajvaad naam ki koi cheej hi nahi bachi hai... yah teeno neta kab kahan chale jaayein iski bhavisyawani karna asambhav hai... aapki post achchi lagi... thanks

अरुण कुमार वर्मा said...

बहुत सही भाई, लगे रहो ।