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Friday, March 7, 2008

आज जिंदगी ऐसे मुकाम पर ला कर खड़ी है की क्या करे कुछ ने पता, हम दुनिया को बदलने का बीडा उठाए थे पर हमसे ही कोई बदल गया! लोग कैसे वादे करते है कसम खाते है , पर सब समाज के झूठे रिवाजों के चलते खोखले हो हो जायेंगे ये पता न था ! कैसे कोई इतना बदल सकता है, कैसे कोई किसी को आधुरे में छोरकर जा सकता है !कभी तो कोई जरुरी जिंदगी भर के लिए, कभी वही कुछ भी नही पल भर के लिए! प्यार के बदलते इस परिवेश को आप क्या नाम देंगे, पता नही। हां लेकिन मेरे जैसे तो ये सवाल जिंदगी भर आपने जेहन मी ले कर समझने की कोशिश करेंगे! आज का युवा आपने को बहुत उदारवादी साबित करता है , खासकर लड़किया , पर जब भी कोई निर्णय लेने की बात हो उन्ही को सबसे पहेले समाज, माँ बाप की इज्जत, सब याद आ जाती है ! पहेले जिंदगी भर साथ देने की कसम लो, फिर कह दो की कुछ नही हो सकता, ओर अगर यही लडके कह दे तो वे धोखेबाज कहलाते है! ओर वे कहें तो समाज, मां-बाप का दबाव..

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