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Thursday, January 27, 2011

बिहारी साथी ध्यान दें।



मुगल सराय से दिल्ली आते समय मगध एक्सप्रेस में लगा ये प्रचार काम की तलाश में बिहार से दिल्ली आनेवालों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार की मनरेगा से भी ज्यादा भरोसा दिलाता दिखाई देता है। विजय कुमार नाम के इन महोदय से बिहार के कितनें लोग संपर्क कर पाये है मैं नहीं जानता, परंतु बिहार के लेखक,पत्रकार,साहित्यकार और बुद्दिजीवियों ने भी अपने बिहार के लिए ऐसा माग़दा नहीं दिखाया होगा। रोज़गार के इस सागर से एक-एक लोटा सभी बेरोज़गार बिहारी भाई-बहन भर लें तो कम-से-कम किसी को अपनें घर से दूर जाकर किसी चाचा-भतीजे के गुंड़ों की पिटाई तो नहीं खानी पढ़ेगी। और ना ही बिहार के नेता रेल मंत्रालय मांगेगे! क्योंकि रोज़गार होगा तो बिहार से दिल्ली-मुंबई ट्रेन चला कर जनता को बाहर का रास्ता दिखाने का विकल्प बचेगा नहीं।

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